हरिद्वार : लोग हर की पौड़ी पर ही क्यों नहाते हैं

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धार्मिक नगरी हरिद्वार एक पवित्र और महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है।  हरिद्वार में हर की पौड़ी को मुख्य और विशेष स्थान माना जाता है। Har ki Pouri का भावार्थ यह है कि हरि यानी नारायण के चरण।
यहां पर यह मान्यता है कि समुद्र मंथन के बाद जब विश्वकर्मा जी अमृत का घड़ा झगड़ रहे देव-दानवों से बचाकर ले जा रहे थे उसी समय पृथ्वी पर अमृत की कुछ बूंदें गिर गई और वह जहां-जहां पर गिरी वह स्थान धार्मिक महत्व रखने वाले स्थान बन गए। अमृत की कुछ बूंदें हरिद्वार में भी गिरी और जहां पर गिरी वह स्थान हर की पौड़ी माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह माना जाता है कि यहां पर स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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हमारे ग्रंथों में एक कथा यह भी है कि राजा भगीरथ ने गंगा को पृथ्वी लाने के लिए यहीं पर तपस्या किया था। जिससे यह स्थान बहुत ही पवित्र है। इस स्थान की महत्ता इसलिए भी है कि वर्षों तक यहां पर राजा भगीरथ ने अपनी साधना और तपस्या से अलौकिक बनाया था। जिससे यहां का वातावरण बहुत ही शांत और पवित्र है। यहां पर हर साल लाखों की संख्या में लोग स्नान करने के लिए आते हैं। देश ही नहीं बल्कि विदेश से भी लोग स्नान करने के लिए आते हैं। यहां का वातावरण इतना सुरम्य और शांत है कि लोग आते ही मोहित हो जाते हैं। लोग चाहते हैं कि हम हमेशा के लिए आकर यहीं पर बस जाएं। हरिद्वार में ठंडा हो या गर्मी का मौसम हर समय लोग यहां पर हर की पौड़ी का आनंद लेने के लिए आते हैं। गर्मी के दिनों में यहां पर इतना शीतल और शांत वातावरण बनता है कि लोग देखते मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।

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